कन्नौज: अस्पताल पहुंचने वाले ज्यादातर लोगों को बुखार, कमजोरी और बदन दर्द की शिकायत

उत्तर प्रदेश के कई जिले इन दिनों रहस्यमयी बुखार, डेंगू की चपेट में हैं। 50 से ज्यादा मौते अकेले फिरोजाबाद में हुई हैं तो कन्नौज में दर्जनों लोग बीमार हैं। बुखार, डेंगू आदि के मामलों को देखते हुए प्रदेश सरकार 5 से 12 सितंबर तक हर जिले में विशेष अभियान चलाएगी।

Ajay MishraAjay Mishra   4 Sep 2021 9:49 AM GMT

कन्नौज: अस्पताल पहुंचने वाले ज्यादातर लोगों को बुखार, कमजोरी और बदन दर्द की शिकायत

कन्नौज में गांव-गांव पहुंचकर लोगों की जांच करती मेडिकल टीम। फोटो- अजय मिश्रा

कन्नौज (यूपी)। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच एक रहस्यमयी बुखार ने कई जिलों में आतंक मचा रखा है। अकेले फिरोजाबाद में 50 से ज्यादा की मौत हो चुकी हैं तो कन्नौज में दर्जनों लोग बीमार हैं। जिले में बुखार और डेंगू जैसे दूसरे लक्षणों के बाद कई लोगों की मौत हो चुकी हैं। हालांकि सरकारी आंकड़ों में जिले में कोई मौत दर्ज नहीं है। जिले में डेंगू मरीजों की सरकारी संख्या भी 18 की है, लेकिन सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी है।

कन्नौज में बलई गांव के सतेंद्र (33वर्ष) बृहस्पतिवार को दौड़ते-भागते जिला अस्पताल पहुंचे थे, साथ में उनकी पत्नी थी, जिनकी गोद में 15 दिन का बच्चा था। बुखार से उसका बदन तप रहा था। ओपीडी में कई और लोग डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। वहां मौजूद कर्मचारी ने बताया कि डॉक्टर साहब इमरजेंसी वार्ड में गए हैं, आते ही होंगे। स्वास्थ्य कर्मी के मुताबिक शुक्रवार (3 सितंबर) को जिला अस्पताल की ओपीडी में एक बजे तक 32 बच्चों को देखा जा चुका था।

जिला अस्पताल के अलावा राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों की लाइन लगी हुई है, जिनमें ज्यादातर ग्रामीण हैं। निजी अस्पतालों में भी बुखार, डेंग-मलेरिया जैसे लक्षणों वाले मरीजों की भीड़ है। बीमार लोगों में बच्चों के साथ बड़े भी हैं।

जिला अस्पताल के ही नीचे वाले वार्ड में तहसील सदर मुरैया बुजुर्ग गांव के निवासी 21 वर्षीय मयंक भर्ती हैं। उन्हें 103 डिग्री बुखार था। मां और भाई ठंडे पानी से सिर और पैर में पट्टी कर रहे थे। दर्द से राहते हुए मयंक ने बताया, "दो-तीन दिन पहले ही बुखार आया, दवा ली तो फायदा नहीं हुआ। गांव में इलाज से मना कर दिया गया, तो परिजन जिला अस्पताल ले आए।"

अब तक जिले में 16 केस डेंगू के निकले हैं। नौ सिर्फ गांव दाईपुर में पाए गए थे, लेकिन अब स्वस्थ्य हो चुके हैं। अब तक जिले में डेंगू से कोई भी मौत रिकार्ड में नहीं हुई है- विनोद कुमार,सीएमओ, कन्नौज
कन्नौज के तिर्वा में स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज। फोटो- अजय मिश्रा

जिले में कई गांव और परिवार ऐसे हैं जहां ज्यादातर लोगों को बुखार ने अपनी चपेट में लिया है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती 65 वर्षीय रामवती थाना इंदरगढ़ क्षेत्र के हिम्मतपुर गांव की रहने वाली हैं। कुछ दिनों पहले उनके पूरे परिवार को बुखार आया था। बाकी लोग ठीक हो गए। उन्हें भर्ती कराना पड़ा है। इसी तरह मक्कापुरवा गांव की 8 साल की प्रिया भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, प्रिया बताती हैं, "पहले दादी को बुखार आया फिर वो भी चपेट में आ गई।" अस्पतालों में आने वाले ज्यादातर लोगों को तेज बुखार, कमजोरी, बदन में दर्द की शिकायत है।

कन्नौज के मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. विनोद कुमार के मुताबिक सीजन चल रहा है तो बुखार के मरीज भी बढ़ेंगे। तीन सितम्बर को अलग-अलग चार ब्लॉकों में स्वास्थ्य टीमें भेजी गई थीं। जिसमें ब्लॉक हसेरन के इमिलिया गांव में बुखार के 10 मरीज निकले हैं। यहां इतनी ही स्लाइड भी बनाई गई हैं। शहर कन्नौज के मोहल्ला काजीटोला में फीवर के 25 मरीज निकले और 13 स्लाइड बनाई गईं। नटियाना बस्ती में 13 मरीज बुखार के पाए गए, सात स्लाइड बनी। इसी तरह ब्लॉक सौरिख के गांव मझगवां में 30 बुखार के मरीज मिले और इतनी ही स्लाइड बनाई गईं।

सीएमओ ने बताया, "अब तक जिले में 16 केस डेंगू के निकले हैं। नौ सिर्फ गांव दाईपुर में पाए गए थे, लेकिन अब स्वस्थ्य हो चुके हैं। अब तक जिले में डेंगू से कोई भी मौत रिकार्ड में नहीं हुई है। स्लाइड बनाने के बाद अगर जांच में कुछ मिलता है तो डेंगू की जांच कराई जाती है।"

सरकारी आंकड़ों में डेंगू की किसी की मौत नहीं हुई है लेकिन बुखार ने कई लोगों की जान ली है,ऐसा मृतकों के परिजनों का कहना है। इंदरगढ़ निवासी अवधेश वर्मा के 10 महीने के पुत्र ईशु की 2 सितम्बर को मौत हो गई। अवधेश वर्मा ने बताया, "बुखार आने पर प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया फिर राजकीय मेडिकल कॉलेज ले गए। हालत गंभीर होने पर कानपुर रेफर कर दिया गया। वहां मौत हो गई।"

इसी तरह भगतपुर्वा निवासी 33 साल की पूजा की भी 29 अगस्त को मौत हो चुकी है। परिजन बुखार से मौत की बात कह रहे हैं। पति कुलदीप का कहना है, "इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं मिला। राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया था। वहीं मौत हो गई।"

इससे पहले 18 अगस्त को ब्लॉक सदर कन्नौज क्षेत्र के रतापुर्वा गांव निवासी पूनम देवी को बुखार आया था। राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के बाद 20 तारीख को कानपुर रेफर कर दिया गया। 25 अगस्त को वहीं इलाज के दौरान मौत हो गई। पूनम की नौ वर्षीय पुत्री रोली को भी 24 अगस्त को कानपुर में भर्ती कराया गया, अगले दिन उसकी भी मौत हो गई। परिजनों व ग्रामीणों ने बुखार के बाद मौत होने की बात कही है।

हालांकि प्रशासन के मुताबिक रतापुर्वा में मां-बेटी (पूनम और रोली) की मौत ब्लड में इंफेक्शन की वजह से हुई है। एलाइजा टेस्ट या पिछली हिस्ट्री के बाद ही डेंगू आदि की पुष्टि होती है। यह टेस्ट राजकीय मेडिकल कॉलेज तिर्वा में ही होता है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. दिलीप सिंह बताते हैं, "ओपीडी में 200-250 नए मरीज आ रहे हैं। कुल मरीजों की संख्या 600 के करीब है। सभी तरह के मरीज आ रहे हैं, इसमें वायरल बुखार के भी शामिल हैं। बुखार कोई भी हो, मलेरिया और वायरल में भी प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। एलाइजा किट टेस्ट में एक मरीज (3 सितंबर) ही डेंगू पॉजिटिव निकला है।"

राजकीय मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 के लिए जो 100 बेड का बच्चों का वार्ड है, उसमें फीवर से ग्रसित बच्चों का इलाज चल रहा है। 13-14 बच्चे भर्ती हैं। दूसरे वार्ड में 19 मरीज भर्ती हैं। यहीं पर 18साल के ऊपर के मरीजों के लिए बने 30 बेड का अस्पताल शुक्रवार को फुल था। ज्यादातर मरीज 2-3 दिन के अंदर ही अस्पताल पहुंचे थे। खामा निवासी राजेश सिंह ने बताया कि पुत्री शिवाही भर्ती है, लेकिन पानी की व्यवस्था मेडिकल कॉलेज में अच्छी नहीं है।

कन्नौज जिले के गांवों में पहुंचकर लोगों की जांच करती टीम।

कई प्राइवेट अस्पताल भी फुल, यहां के डेंगू मरीजों का रिकार्ड नहीं

मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में डेंगू की जांच होती है, लेकिन प्राइवेट अस्पताल या निजी नर्सिंग होम में होने वाली जांच में पाए गए डेंगू पॉजिटिव की रिपोर्ट सरकारी महकमे के पास नहीं पहुंचती है। नर्सिंग होम में जांच के बाद डेंगू पॉजिटिव पाए गए मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया जाता है। इन दिनों यह अस्पताल भी बुखार के मरीजों से पटे पड़े हैं।

पांच दिन पहले तिर्वा गंज के इंदरगढ़ तिराहे पर स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती हुईं ग्राम पंचायत अधिकारी प्रियंका सिंह ने बताया कि बुखार में आने पर जांच कराई तो डेंगू बताया गया। प्लेटलेट्स भी डाउन हो गईं थी। चार दिन में 71 हजार से प्लेटलेट्स 81 हजार पहुंच गई। उन्होंने बताया कि अस्पताल में काफी मरीज आ रहे हैं, ज्यादातर बुखार के ही हैं। उनकी दोस्त की बहन भी डेंगू से पीड़ित थी, जो स्वस्थ्य होकर घर चली गई।

प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिंग होम में भर्ती बुखार वाले मरीजों और डेगूं मरीज को लेकर पूछने पर सीएमओ डॉ. विनोद कुमार ने कहा, "प्राइवेट अस्पताल में डेंगू की जांच की रिपोर्ट उनके पास नहीं आती है। वह (सरकार) एलाइजा टेस्ट रिपोर्ट को ही मान्य करते हैं। जिला अस्पताल में डेंगू की पहली जांच होने के बाद जिन मरीजों में लक्षण मिलते हैं, उनको राजकीय मेडिकल कॉलेज जांच के लिए भेजा जाता है।"

प्रदेश में 5 से 12 सितंबर तक चलेगा जलजनित और विषाणुजनित बीमारियां रोकने के लिए अभियान

प्रदेश में बढ़ते वायरल बुखार डेंगू आदि बीमारियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में जलजनित और विषाणुजनित बीमारियों से बचाव और रोकथाम के लिए 5 सितंबर से 12 सितंबर तक एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। जिसकी निगरानी के लिए लखनऊ से सीनियर अधिकारियों को भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सिद्धार्थनगर में एक कार्यक्रम कहा, "जलजनित और विषाणुजनित बीमारियों से बचाव के लिए 5 सितंबर से 12 सितंबर तक हर जिले में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को स्वास्थ्य विभाग, नगर विकास, ग्राम विकास और पंचायती राज के साथ महिला और बाल विकास विभाग मिलकर चलाएंगे, जिसमें हर परिवार स्क्रीनिंग होगी, स्वच्छता और सैनेटाइजेश के साथ ही पेयजल की स्थिति को देखा जाएगा। ताकि डेंगू, मलेरिया, इंसेफेलाइटिस, कालाजार, चिनकगुनिया,डायरिया हैजा आदि बीमारियों से बचाव हो सके।

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