'मेरी प्यारी जिंदगी': शराब के खिलाफ गांव कनेक्शन और डब्ल्यूएचओ का एक संयुक्त अभियान

शराब पीने से न केवल लीवर, कैंसर और टीबी जैसी बीमारियां होती हैं बल्कि ये गंभीर मानसिक रोगों के लिए भी जिम्मेदार है। सेहत से जुड़ी 200 से ज्यादा बीमारियां शराब के सेवन से जुड़ी हुई हैं। गांव कनेक्शन और विश्व स्वास्थ्य संगठन सामुहिक रूप से शराब के खिलाफ एक सामाजिक अभियान चला रहा है- ‘मेरी प्यारी जिंदगी’। इस सीरीज में पंद्रह ऑडियो कहानियां, 10 वीडियो कहानियां और मीम्स हैं। इसका उद्देश्य शराब से होने वाली शारिरिक और मानसिक बीमारियों को लेकर लोगों को करना है।

मेरी प्यारी जिंदगी: शराब के खिलाफ गांव कनेक्शन और डब्ल्यूएचओ का एक संयुक्त अभियान

शराब हमारी कई सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा बनी हुई है। इसके सेवन से बहुत लोगों को खुशी मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शराब पीने से होने वाली मौतें, टीबी, HIV/AIDS और डायबटीज जैसी बीमारियों से होने वाली मौतों की तुलना में कहीं अधिक हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में, शराब के कारण दुनिया भर में लगभग 30 लाख लोग (कुल मौतों का 5.3 प्रतिशत) मारे गए थे।

इस मुद्दे को लेकर हाल ही में देश का सबसे बड़ा रूरल मीडिया प्लेटफार्म गांव कनेक्शन औऱ WHO दक्षिण-पूर्व एशिया (WHO SEARO) एक साथ मिलकर खड़े हुए हैं। ये शराब के खिलाफ एक सामाजिक अभियान चला रहे हैं, जिसे नाम दिया है 'मेरी प्यारी जिंदगी'।

गांव कनेक्शन के संस्थापक नीलेश मिसरा द्वारा सुनाई गईं पंद्रह ऑडियो कहानियां, 10 वीडियो और मीम्स से 'मेरी प्यारी जिंदगी' सीरीज को तैयार किया गया है। नीलेश मिसरा कहानी सुनाकर युवा और बूढ़े लोगों में बढ़ते शराब के सेवन और उससे होने वाली शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के खतरे से आगाह कर रहे हैं।

इस सामाजिक अभियान का उद्देश्य शराब से शरीर और मन पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना हैं।

अभियान के बारे में बात करते हुए मिसरा कहते हैं कि लोग भूलते जा रहे हैं कि शराब अभी भी गंभीर बीमारियों की वजह है। यह कई लोगों की मौत का कारण बनती हैं और परिवारों को बर्बाद कर रही है।

वह आगे कहते हैं, "शराब को विज्ञापन और फिल्मों में बड़े ही ग्लैमराइज़ अंदाज में परोसा जाता है। उनके लिए ये एक सामान्य बात है। इसे लेकर जोक्स और मीम्स बनाए जाते हैं। WHO के साथ मिलकर, कहानियों के जरिए लोगों को शराब को लेकर जागरुक बनाने और आगाह करने का यह एक साझा प्रयास है।"

मिसरा पिछले एक दशक से सरकारों और संगठनों को समाजिक मुद्दों से सचेत करने के लिए ऑडियो स्टोरीटेलिंग का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। उन्होंने अब इसमें नयापन लाते हुए विजुअल माडिया को भी जोड़ दिया है।

जीवन से जुड़ी कहानियां

'मेरी प्यारी जिंदगी' सीरीज की हर एक कहानी सिर्फ सात से आठ मिनट लंबी है। लेकिन उतने ही समय में ये हमें हमारे घरों, पड़ोस, हमारे स्कूलों-कॉलेजों और ऑफिस में रोजाना होने वाली घटनाओं को बड़े शानदार ढंग से कह जाती हैं।

द स्लो कंटेंट के लिए लिखी गई इन 15 कहानियों में से, अनुलता राज नायर की लिखी दो कहानियों के ऑडियो को हाल ही में लॉन्च किया गया है। साधारण तरीके से सुनाई गई ये कहानियां अपने पीछे एक गहरी सीख छोड़ जाती हैं। नीलेश मिसरा द स्लो कंटेंट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक हैं और अनुलता राज नायर इसकी डिप्टी क्रिएटिव हेड हैं।

'कूल दोस्त' नामक पहली ऑडियो कहानी, एक युवा लड़की की है। जिसने हाल ही में कालेज ज्वाइन किया है। लड़कों को लेकर उसकी अपनी एक सोच है। जब वह अपने नए दोस्तों के साथ एक क्लब/बार में जाती है तो वहां बड़े ही संकोच के साथ संतरे का जूस मंगवाती है। और फिर कैसे एक झटके में उसकी सोच गलत साबित हो जाती है!

दूसरी कहानी है 'मेरे हीरो'। इसमें एक युवक अपने माता-पिता के साथ, बड़े शहर की चमक-दमक और अपनी नई नौकरी के लिए वहां जाने के बारे में अपना उत्साह को साझा करता है। लेकिन तभी व्हीलचेयर पर बैठे उसके पिता अपनी जिंदगी से जुड़ा एक सच उसके सामने लेकर आते हैं।

मेरी प्यारी जिंदगी की वीडियो कहानियों में शराब के आदी हो चुके लोगों की आपबीती के अलावा परिवार के सदस्यों, डॉक्टरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय भी शामिल की जा रही है।

भारत में बढ़ रही है शराब की खपत

WHO की 'ग्लोबल स्टेट्स रिपोर्ट ऑन अल्कोहल एंड हेल्थ- 2018' रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 15 साल से अधिक उम्र की आबादी में प्रति व्यक्ति कुल शराब की खपत 2005 में 5.5 लीटर थी जो 2010 में बढ़कर 6.4 लीटर हो गई और 2016 में 6.4 लीटर के स्तर पर थी।

जबकि WHO अफ्रीकी क्षेत्र, अमेरिका और पूर्वी भूमध्य क्षेत्र में, प्रति व्यक्ति शराब की खपत स्थिर रही। यूरोपीय क्षेत्र में, साल 2005 में यह 12.3 लीटर थी जो 2016 घटकर 9.8 लीटर हो गई। लेकिन WHO पश्चिमी प्रशांत और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति शराब की खपत में वृद्धि देखी गई है। इन देशों में से भारत एक है।

WHO पश्चिमी प्रशांत और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति शराब की खपत में वृद्धि हुई है। इन क्षेत्रों में अत्यधिक आबादी वाले देश चीन और भारत, शराब की इस बढ़ती खपत के लिए जिम्मेदार हैं- (चीन: 2005 में 4.1लीटर, 2010 में 7.1लीटर और 2016 में 7.2 लीटर। भारत: 2005 में 2.4 लीटर, 2010 में 4.3 लीटर और 2016 में 5.7 लीटर)

डब्ल्यूएचओ की 2018 की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2025 तक, अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत में 15 साल और उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों में प्रति व्यक्ति कुल शराब की खपत बढ़ने का अनुमान है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि "दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में शराब पीने वालों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि की उम्मीद है, अकेले भारत में शराब की खपत में 2.2 लीटर बढ़ जाएगी। भारत इस क्षेत्र की कुल आबादी के एक बड़े अनुपात का प्रतिनिधित्व करता है।"

WHO की 'ग्लोबल स्टेट्स रिपोर्ट ऑन अल्कोहल एंड हेल्थ- 2018' रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 15 साल से अधिक उम्र की आबादी में प्रति व्यक्ति कुल शराब की खपत 2005 में 5.5 लीटर थी जो 2010 में बढ़कर 6.4 लीटर हो गई और 2016 में 6.4 लीटर के स्तर पर थी।

2016 में, शराब के चलते दुनिया भर में लगभग 30 लाख मौतें (सभी मौतों का 5.3 प्रतिशत) हुईं थीं। 2016 में दुनिया भर में शराब के सेवन से होने वाली सभी मौतों में से 28.7 प्रतिशत चोटों के कारण, 21.3 प्रतिशत पेट से जुड़ी बीमारियों, 19 प्रतिशत हृदय रोगों, 12.9 प्रतिशत संक्रामक रोगों और 12.6 प्रतिशत कैंसर के कारण हुई थीं।

इसके अलावा, दुनिया भर में शराब, 2016 में समय से पहले (69 वर्ष और उससे कम उम्र के व्यक्तियों में) हुई सभी मौतों में से 7.2 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार थी।

इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक भविष्यवाणी में कहा है कि 2030 तक मानसिक बीमारियों के कारण भारत को 1.03 ट्रिलियन अमरीकी डालर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। शराब के सेवन के साथ बहुत सारी मानसिक समस्याएं जुड़ी हुई हैं। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार, लगभग 15 करोड़ भारतीयों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की जरुरत है, लेकिन वास्तव में 3 करोड़ से भी कम लोग हैं, जो अपनी मानसिक बीमारियों के इलाज की कोशिशों में लगे हैं।

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अनुवाद: संघप्रिया मौर्या

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