पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस ही नहीं, खाने का तेल भी हो गया महंगा, प्याज और दाल भी बिगाड़ रहे बजट

पेट्रोल, डीजल के दाम रोज नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। रसोई गैस की कीमत भी पिछले दो महीनों में लगातार बढ़ने के चलते सुर्खियों में है लेकिन खाना बनाने के ही नहीं, खाने की भी कई चीजें महंगी हुई हैं, जो कोरोना काल में आम लोगों का बजट बिगाड़ रही हैं।

Mithilesh DharMithilesh Dhar   1 March 2021 12:15 PM GMT

onion, pulses, edible oil, price hike, lpg gas price hikeप्याज, दाल और खाने के तेल भी महंगे हुए। (फोटो- गांव कनेक्शन, pixaba)

पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई रिपोर्टस में बताया जा रहा कि पिछले दो महीने में जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 8 रुपए की बढ़ोतरी हुई है तो वहीं एलपीजी गैस सिलेडंर की कीमत 100 रुपए तक बढ़ गई है, लेकिन आम लोगों पर महंगाई की मार बस इन्हीं दो चीजों की वजह से नहीं पड़ रही। फरवरी महीने में प्याज, दाल और खाने के तेल की बढ़ी कीमतों ने भी आम लोगों का बजट बिगाड़ा है।

फरवरी यानी साल के दूसरे महीने में जनवरी की अपेक्षा प्याज की खुदरा कीमतों में 10 से 20% की बढ़ोतरी हुई है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार एक जनवरी को देश की राजधानी नई दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमत 40 रुपए प्रति किलो थी जो 27 फरवरी को 50 रुपए प्रति किलो हो गई। इसी तरह देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्याज की खुदरा कीमत एक जनवरी को 44 रुपए प्रति किलो थी जो फरवरी 27 को 60 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्याज की खुदरा कीमत इस दौरान 45 से 55 रुपए किलो पहुंच गई।

लॉकडाउन के बाद अक्टूबर में प्याज की खुदरा कीमत कई शहरों में 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। तब कहा जा रहा था कि दिसंबर महीने से प्याज की कीमतें कम होने लगेंगी। कीमत नीचे आई भी, लेकिन अब एक बार फिर प्याज आम उपभोक्ताओं को रुला रहा है। प्याज की कीमत को कम करने के लिए सरकार ने प्याज की आयात सीमा को भी 15 दिसंबर से बढ़ाकर से 31 जनवरी तक कर दिया था।

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नई दिल्ली की आजादपुर मंडी में प्याज के कारोबारी राजेश कुमार गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "फरवरी के दूसरे सप्ताह में नासिक से प्याज की खेप आने वाली थी, लेकिन बारिश के कारण आपूर्ति नहीं हो पाई। अभी भी आवक बहुत कम है। आवक बढ़ेगी तो आने वाले समय में प्याज की कीमत नीचे आ सकती है। अभी तो कीमतें 15 से 20 फीसदी तक बढ़ी हैं।"

प्याज के अलावा दाल और खाने का तेल भी महंगा हुआ है। उड़द की कीमत जनवरी की तुलना में 10% से 12% तक बढ़ी है। अरहर दाल (तूर) की कीमत भी 10 से 15% तक बढ़ी है। थोक खाद्य तेल की कीमतें इस साल जनवरी से लेकर अब तक 30% से 60% तक बढ़ चुकी हैं।

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साल के पहले दिन यानी एक जनवरी को देश की राजधानी नई दिल्ली में अरहर दाल की खुदरा कीमत प्रति किलो 100 रुपए में थी जो 27 फरवरी को बढ़कर 108 रुपए प्रति किलो को गई। इस दौरान उड़द दाल की कीमत 105 से 118 रुपए प्रति किलो हो गई।

दाल की कीमतें क्यों बढ़ी हैं, इस बारे में हमने इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बिमल कोठारी से बात की। उन्होंने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, "किसानों को फायदा देने के लिए दाल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी हुई है। अब जब महंगी दर पर खरीदी होगी तो उससे कम में तो बाजार में बिकेगी नहीं। और कई राज्यों में उड़द और अरहर की खेती को मौसम के कारण नुकसान भी पहुंचा है। कीमत इसलिए भी बढ़ी है, लेकिन इतनी नहीं बढ़ी कि इससे घर का बजट खराब हो जाये।"

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तेल उद्योग के सबसे बड़े संगठन साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने नवंबर 2020 में ही कहा था कि देश में तिलहन की पैदावार बढ़ने की संभावना है जिस कारण वर्ष 2021 में तेल आयात में कमी आयेगी, लेकिन उपभोक्ताओं को मार्च-अप्रैल तल खाने के तेलों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।

एसईए के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, " कई अंतरराष्ट्रीय वजहों से खाद्य तेलों की कीमतें मार्च से पहले कम नहीं होंगी। हमारी रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2020 की अपेक्षा फरवरी 2021 में रिफाइंड सोया तेल 36%, रिफाइंड कपास तेल 39%, रिफाइंड राइस ब्रान 43%, रिफाइंड सूरजमुखी तेल 68% और रिफाइंड मूंगफली तेल 39 फीसदी तक महंगा हो चुका है।"

बीवी मेहता ने आगे बताया कि इस साल की बात करें तो देशभर में जनवरी की अपेक्षा रिफाइंड नारियल तेल की कीमत में 5%, रिफाइंड सोयाबीन में 3% और रिफाइंड राइस ब्रान ऑयल की कीमत में 5% की बढ़ोतरी हुई है।

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