बलरामपुर केस: माइक के सामने और माइक के पीछे का सच, आधे सच और अफ़वाहों के बीच रास्ते टटोलता एक ख़ामोश कस्बा

जब हाथरस केस को लेकर देशभर में हंगामा मचा था तभी यूपी के बलरामपुर जिले से खबर आई कि एक लड़की को गैंगरेप के बाद मरने के लिए छोड़ दिया गया। पुलिस ने 2 आरोपियों को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था, परिजनों के मुताबिक वो जांच से संतुष्ट हैं, लेकिन पीड़िता की मौत से पहले क्या हुआ और मौत की वजह को लेकर किसी के पास संतोषजनक जवाब नहीं, गांव कनेक्शन की विशेष रिपोर्ट

Neetu SinghNeetu Singh   3 Oct 2020 12:48 PM GMT

बलरामपुर केस: माइक के सामने और माइक के पीछे का सच, आधे सच और अफ़वाहों के बीच रास्ते टटोलता एक ख़ामोश कस्बा

नीतू सिंह और मुहम्मद आरिफ़ की रिपोर्ट

बलरामपुर (उत्तर प्रदेश)। यहां उस तरह का मातम नहीं है, कोई आरोप नहीं लगा रहा, दो समुदायों के बीच मनमुटाव भी नहीं दिखता, कहीं नारे नहीं गूँज रहे। उत्तर प्रदेश के दो जिले हाथरस और बलरामपुर में दो दलित लड़कियों के साथ दरिंदगी, पीड़िताओं की मौत और रात में अंतिम संस्कार को लेकर सुर्खियों में हैं, लेकिन बलरामपुर जिले का माहौल हाथरस से बिलकुल अलग नजर आ रहा है।

हाथरस से लगभग 550 किलोमीटर दूर यूपी के बलरामपुर जिले के इस गाँव (कस्बा भी कह सकते हैं) में हाथरस की तरह सनसनी, मीडिया, नेता और पत्रकार कोई नहीं हैं। परिजनों के मुताबिक यहां भी 22 साल की लड़की से गैंगरेप के बाद हत्या हुई। युवती के शव का रात में ही अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों के मुताबिक अंतिम संस्कार उनकी मर्जी से किया गया और पुलिस की कार्रवाई से भी वो संतुष्ट हैं।

देशभर में 29 सितंबर को जब हाथरस मामले को लेकर लोग धरना प्रदर्शन कर रहे थे, सोशल मीडिया पर लिखकर अपना आक्रोश जता रहे थे उसी वक़्त बलरामपुर जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर गैसड़ी कस्बे के एक गांव में पीड़ित परिवार के अनुसार उनकी बेटी जो बीकॉम थर्ड ईयर में अपना दाखिला कराने गई थी। जब वो शाम पांच बजे तक वापस नहीं लौटी तब परिवार के लोगों ने फोन करना शुरू किया। पीड़िता का फोन नहीं उठा तो परिवार की चिंता बढ़ने लगी। परिजनों के मुताबिक लड़की को खोजा जा रहा था इसी दौरान एक रिक्शा चालक उसे लेकर घर आया, उसके हाथ में वीगो (ग्लूकोज चढ़ाने या इंजेक्शन लगाने के लिए) लगा हुआ था, लड़की कुछ भी बोलने और चलने की स्थिति में नहीं थी।

पीड़िता के घर के बाहर का दृश्य.

दो अक्टूबर को बलरामपुर पहुंची गांव कनेक्शन टीम से पीड़िता की माँ ने बताया, "उसके कपड़ों में खून लगा हुआ था। वो लुंजपुंज (चलने और बोलने की स्थिति में नहीं थी) थी, हल्का-फुल्का (थोड़ा बहुत) खून भी निकल रहा था। वो कह रही थी 12 बजे वो दाखिला कराकर घर आने के लिए खड़ी थी। तभी कार से कुछ लोग आए और उसे गाड़ी में बिठा लिया। हाथ में इंजेक्शन लगा दिया फिर उसको कुछ भी याद नहीं कि दिन में उसके साथ क्या हुआ?"

बदहवास स्थिति में घर पहुंची पीड़िता को लेकर परिजन आसपास के डॉक्टरों के पास भागे। वहां से जवाब मिलने पर वो बलरामपुर जिला मुख्यालय ले जा रहेे थे। परिजनों के मुताबिक गाड़ी दस मिनट ही चल पाई और पीड़िता की मौत हो गई। पीड़िता के घर आने और मौत होने के बीच का वक़्त लगभग आधे घण्टे का था।

पीड़िता के परिजनों को पीड़िता के हाथ में वीगो देखकर शक हुआ कि लड़की का कहीं इलाज किया गया है, इसी आधार पर उन्होंने आसपास के डॉक्टरों से पूछताछ की। स्थानीय बाजार में ज्यादातर लोग एक दूसरे से परिचित होते हैं। इसलिए कुछ देर में पीड़िता के नाना को डॉक्टर जियाउर्रहमान के बारे में पता लग गया। जिनके बताये अनुसार आरोपियों की पहचान की गयी।

पीड़िता के नाना ने बताया, "हम तुरंत थाने गए और थाना इंचार्ज को पूरा घटनाक्रम बताया। पुलिस ने पहले डॉक्टर को पकड़ा और पूछा कि हाथ में वीगो क्यों लगाई? डॉक्टर ने दो लोगों के नाम बताए जिनके यहां से उन्हें एक लड़का दिन में इलाज के लिए बुलाने आया था, जब डॉक्टर मुख्य आरोपी की दुकान के पीछे बने कमरे में गए तो उन्होंने लड़की की हालत खराब देखी और कोई महिला न होने की वजह से इलाज करने के लिए मना कर दिया। फिर आरोपी दूसरे डॉक्टर के यहाँ जाकर एक कम्पाउण्डर को ले लाये जिसने वीगो लगाई थी।"

पीड़िता के नाना के अनुसार पुलिस ने इस आधार पर दो आरोपियों को उसी रात गिरफ्तार कर लिया। 29 सितंबर की रात गैसड़ी कोतवाली के बाहर रातभर पीड़िता की लाश रखी रही। 30 सितंबर सुबह करीब 07-08 बजे पीड़िता का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। रात करीब 08-09 बजे पीड़िता का पोस्टमार्टम होकर आ गया और रात में ही दाह संस्कार कर दिया गया। बलरामपुर पुलिस के ट्वीटर हैंडल से बताया गया कि लड़की की कमर, रीढ़ तोड़ने की बातें अफवाह हैं, पोस्टमार्टम में इसकी पुष्टि नहीं हुई।

ये हैं पीड़िता के नाना जो पुलिस की कार्रवाई से खुश हैं.

बलरामपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ घनश्याम सिंह ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया, "पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सेक्सुअल एक्टिविटी पॉजिटिव हैं लेकिन लोकल पार्ट में इंजरी नहीं है। लीवर में इंजरी थी, लीवर से ब्लीड हुआ (खून निकला) है, ब्लीडिंग पेट के अन्दर ही धीरे-धीरे होती रही जिसकी वजह से डेथ (मौत) हुई है।"

महिला मुद्दों पर लगातार काम करने वाली वकील रेनू मिश्रा पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के बारे में कहती हैं, "इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के साथ रेप या गैंगरेप की संभावना न के बराबर है।"

मामले में 2 अक्टूबर की शाम तक चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। गैसड़ी थाना इंचार्ज कमलेश कुमार ने बताया, " रिपोर्ट दर्ज करने के बाद दो आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था। दो अक्टूबर की शाम दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसमें एक रिक्शा चालक (जो लड़की को लेकर आया था।) और दूसरा कम्पाउण्डर (जिसने इलाज किय़ा) था।"

हाथरस की तरह गाँव में न मीडिया को जाने की मनाही है और न ही किसी तरह की कोई बैरीगेटिंग है, न लोगों में आक्रोश है और न गुस्सा। हालांकि इस मामले में कैमरे के सामने की जो कहानी है वो कुछ और है और पीछे की कुछ और।

रात के साढ़े दस बजे घर में सिर्फ पीड़िता का परिवार और उनके कुछ एक रिश्तेदार हैं, मध्यम रोशनी के बीच कुल 10-12 पुलिसकर्मी बैठे हैं। लोकल इंटेलिजेंसी यूनिट (एलआईयू) के एक दो लोग और इसके अलावा रात का सन्नाटा पसरा है।

अभी तक आपने जो खबर पढ़ी वो खबर पीड़ित परिवार और पुलिस के बयानों के आधार पर है। लेकिन जब गाँव कनेक्शन ने 2 अक्टूबर को गाँव पहुंचकर सुबह 9 बजे से लेकर रात्रि 11:30 बजे तक इस खबर की पड़ताल की तो इस मामले के कई पहलू सामने आये हैं। परिवार के अंदर से लेकर गांव के नुक्कड़ तक मौत के पहले, मौत की वजह और मौत के बाद क्या हुआ को लेकर कई चर्चाएं हैं।

एक दुकान पर चर्चा करते आसपास के ग्रामीण.

इस पूरे मामले की ग्राउंड रिपोर्टिंग में गाँव कनेक्शन ने सबसे पहले ग्राम प्रधान और एक दुकान पर बैठे कुछ लोगों से जानकारी ली। इसके बाद पीड़िता के परिवार, पड़ोसी, आरोपी की दुकान के आसपास के लोगों से पूछताछ की। उन दो क्लीनिक तक भी पहुंचे जिनका इस केस में जिक्र है पर डॉक्टरों से बात नहीं हो पायी। पुलिस और आरोपी परिवार का भी पक्ष जाना। उस संस्थान से भी बात की जहाँ वो नौकरी करती थी।

इस पूरी पड़ताल में कोई प्रेम प्रसंग का मामला बता रहा तो कोई दबी जुबान से पीड़िता के गर्भ से बच्चा गिराने की बात कह रहा, लेकिन पीड़िता के साथ गैंगरेप जैसी वारदात पर लोगों ने चुप्पी साध ली। लोगों ने इतना जरूर कहा कि पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए जिसने भी उसके साथ गलत किया है।

ग्राम प्रधान के अनुसार लगभग 3,000 गाँव की आबादी है। पीड़िता शिल्पकार (अनुसूचित जनजाति) से है। पीड़िता का पूरा परिवार कुछ साल पहले इस गाँव में आकर रहने लगा था, यहाँ पीड़िता का ननिहाल है। पीड़िता तीन बहन और एक भाई में दूसरे नम्बर की थी। वो लगभग एक डेढ़ साल से एक गैर सरकारी संगठन पानी संस्था में कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के पद पर काम करती थी। जहाँ उसे महीने के 3,000 रूपये मिलते थे। उसका काम किसानों को खेती-किसानी के प्रति जागरूक करना था। पीड़िता के नाना ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रह चुके हैं।

पीड़िता के माता-पिता आज भी पत्थर से सिलवट और चक्की जैसी दूसरी चीजों को बनाने का काम करते हैं। पीड़िता और आरोपी के घर के बीच की दूरी लगभग एक किलोमीटर है। इस गाँव से कोतवाली की दूरी एक किलोमीटर है। गाँव में लड़कियों के पढ़ने के लिए एक कन्या इंटर कॉलेज है। ये कहने को तो गाँव है पर कस्बे जैसा ही है।

पीड़ित परिवार के सभी सदस्यों के बयान भी काफी अलग-अलग हैं। पुलिस और पीड़ित परिवार के बयानों में भिन्नता है। बातचीत के दौरान रिपोर्ट और बयान एक जैसे नहीं मिले। रिपोर्टिंग के शुरुआती एक घंटे में इस घटना से जुड़ी कई बातें सामने आयीं जो इस मामले को गैंगरेप से बिलकुल अलग करती हैं।

इस कीचड़ के पीछे आरोपी के कमरे का पीछे का दरवाजा खुलता है जहाँ से पीड़िता को बाहर निकाला था.

गाँव कनेक्शन की पड़ताल :

क्या कहती है पुलिस?

जब घटना 29 सितंबर की है तो एफआईआर 30 सितंबर को शाम सात बजकर बारह मिनट पर क्यों लिखी गयी? इस सवाल के जवाब में बलरामपुर पुलिस अधीक्षक देवरंजन वर्मा कहते हैं, "इस घटना की थाने में 29 सितंबर को रात में पीड़िता के भाई ने केवल यह सूचना दी थी कि उसके हाथ में वीगो लगी हुई थी, बहन की तबियत खराब थी और उसकी डेथ हो गयी है। 30 सितंबर की सुबह बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था। जब 30 सितंबर को दोपहर मीडिया में खबर चलने लगी कि हाथरस जैसा ही कांड बलरामपुर में हुआ तो हमने तुरंत पीड़ित परिवार से पूछताछ की।"

देवरंजन वर्मा आगे कहते हैं, "पूछताछ में पीड़ित परिवार ने दो लोगों पर शक जाहिर किया। शक के आधार पर पुलिस पूछताछ के लिए तुरंत दोनों आरोपियों को थाने लेकर आयी। परिवार उस दिन भी एफआईआर लिखवाने के लिए तैयार नहीं था, वो लोग कह रहे थे कि हम अगले दिन लिखवाएंगे। पर हमने उनसे तुरंत पोस्टमार्टम हाउस में ही एफआईआर लिखवाई और इसके बार दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में पीड़ित परिवार ने दो और लोगों के नाम लिखवाये उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।"

अभी जांच में क्या निकलकर आया है? इस सवाल के जवाब में पुलिस अधीक्षक कहते हैं, "हम सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। अभी हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का बहुत गहराई से अध्ययन किया है। पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है जो भी दोषी है उसे सजा मिले।"

ये है आरोपी का वो कमरा जहाँ पीड़िता के होने की बात कही जा रही है, इसी पीछे रास्ते से पीड़िता को रिक्शे से घर भेजा गया.

क्या कहते हैं पीड़िता के नाना?

रात के करीब 10 बजे पीड़िता के नाना एक व्यक्ति के साथ चारपाई पर बैठकर शराब पी रहे थे। वो हमसे बात करने की स्थिति में भी नहीं थे। उन्होंने गांव कनेक्शन की रिपोर्टर से कहा, "इतनी रात हो गयी है आप क्यों परेशान हैं, आप भी अपने घर जाईये और हमें भी आराम करने दीजिये। हमें जो चाहिए था वो सब सेट हो गया है। हमें किसी से अब कोई शिकायत नहीं।"

जब हमने उनसे कहा हम लखनऊ से आये हैं अभी वापसी भी करनी है, बस आपसे ही बात नहीं हो पायी, ऐसा पता चला है कि मामले की पूरी जानकारी आपके पास ही है। काफी कोशिश के बाद वो कमरे के अंदर बात करने को तैयार हुए, उन्होंने एक तरफ जहाँ कुछ लोग बैठे थे उनकी तरफ इशारा करते हुए कहा, "एक अधिकारी बैठे हुए हैं, सब कुछ मदद हो रही है। अब कुछ बोलेंगे तो उन्हें लगेगा कि शिकायत कर रहे हैं।"

पीड़िता के घर के बाहर बहुत रोशनी नहीं थी, दूर बैठे लोगों के चेहरे साफ़ नहीं दिख रहे थे। कमरे में चारपाई पर बैठकर पीड़िता के नाना ने पूरा घटनाक्रम बताया, "लड़की के घर आने के तुरंत बाद उसके मम्मी पापा उसे दिखाने अस्पताल ले गये लेकिन हम तुरंत पास की बाजार में पता करने चले गये कि इसके हाथ में वीगो किसने लगाई? क्योंकि वो कुछ बोल नहीं पा रही थी। हमें एक घंटे के अन्दर पता चल गया और हम तुरंत थाने पहुंच गये। आरोपी भागे नहीं इसलिए पुलिस ने एफआईआर न लिखकर पहले दोनो आरोपियों को उसी रात घर से पकड़ लिया।"

पीड़िता के हाथ में वीगो देखकर क्या शक हुआ? इस पर पीड़िता के नाना बोले, "उसको देखकर लग रहा था कि इसके साथ कुछ तो गलत हुआ है। चौराहे पर सब जान पहचान के लोग हैं तभी हम तुरंत यह पता लगाने चले गये कि वीगो किसने लगाया? मैं सोच रहा था कि अगर वीगो लगाने वाले डॉ का पता चल गया तो हमें पूरा मामला पता चल जाएगा।"

क्या पुलिस ने आपकी मर्जी के खिलाफ शव रात में अंतिम संस्कार किया? इस सवाल के जवाब में पीड़िता के नाना ने कहा, "नहीं, घटना हुए बहुत घंटे हो गये थे मिट्टी (डेड बॉडी) से बदबू न आने लगे इसलिए रात में ही अपनी मर्जी से दाह संस्कार कर दिया था।"


दो अक्टूबर को रात्रि करीब 9 बजे पीड़िता के नाना और पीड़िता की माँ थाने से लौटकर आये थे। हमने उनसे पूछा क्या आप अबतक की पुलिस कार्रवाई से खुश हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया, "शुरुआत में पुलिस ने बहुत फुर्ती से काम किया लेकिन बाद में पुलिस हमारे साथ चापलूसी करने लगी।"

किस तरह की चापलूसी? "जो काम पुलिस को जल्दी करना चाहिए उसमें डिले (देरी)करने लगी। हमने सोचा अगर ये ऐसे ही डिले करेंगे हमारा तो खेल खराब हो जाएगा। कल जब हमने खूब विरोध किया तब पुलिस ने फिर फुर्ती दिखाई। अभी थाने से आ रहे हैं अब सभी आरोपियों को पकड़ लिया है। अब हमारी पुलिस से कोई शिकायत नहीं, हम पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट हैं, "

पीड़िता के नाना बोले, "पुलिस पूछताछ के लिए डॉ को भी बिठाए है पर हमने कहा कि इन्हें छोड़ दो इनकी कोई गलती नहीं।"

आपको डॉक्टर की गलती क्यों नहीं लग रही? इस पर वो बोले, "उसने इलाज थोड़े किया था, वही तो वो व्यक्ति है जिससे हमें सही आरोपियों का पता चला। अगर वो किसी को न बताता कि हमें इलाज के लिए बुलाया था तो हम आरोपी तक पहुंच ही नहीं पाते। हाँ, उस कम्पाउण्डर की गलती है जिसने उसके हाथ में वीगो लगाई।"

जब गाँव कनेक्शन ने पीड़िता के नाना से पूछा कि आप कह रहे पीड़िता बोल नहीं पा रही थी और उसने कुछ नहीं बताया जबकि पीड़िता की माँ कह रही हैं कि लड़की जब घर आयी तो उसने उन्हें ये बताया कि जब वो कॉलेज से एडमिशन कराकर घर लौटने के लिए गाड़ी का इंतजार कर रही थी तभी एक गाड़ी आयी, उससे कुछ लोग उतरे और उसे उठाकर गाड़ी में डाल लिया, हाथ में नशे का इंजेक्शन लगा दिया, फिर उसे कुछ याद नहीं कि उसके साथ क्या हुआ?

इस पर पीड़िता के नाना ने कहा, "मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं, हो सकता है उसने अपनी माँ को ये बात बताई हो।"

अबतक आपको क्या कोई सहायता राशि मिली है इस पर पीड़िता के नाना बोले, "हां, छह लाख 18,000 पहले मिल गये हैं, अभी कभी डेढ़ दो बीघा जमीन देने के लिए कह रहे हैं। जमीन कृषि योग्य तो नहीं है लेकिन रेलवे लाइन के पास में है जो हमारे फायदे में है। आज तो नहीं लेकिन कुछ समय बाद उसकी कीमत पचासों लाख हो जायेगी।"

आसामानी रंग की साड़ी पहने पीड़िता की माँ.

क्या कहती हैं पीड़िता की माँ

चारों तरफ महिलाओं से घिरी बैठी आसमानी रंग की साड़ी पहने पीड़िता की माँ बेटी की फ़ाइल फोटो सीने में लगाकर रोए जा रहीं थीं। वो रोते-रोते कह रही थीं, "बिटिया की सुन्दरता में ग्रहण लग गया। पढ़ लिखकर वकील बनना चाहती थी। कहती थी बस मुझे तीन साल वकालत का कोर्स करा दो, अम्मा हम घर की गरीबी दूर कर देंगे।" पर अब इस माँ के पास सिर्फ अपनी बेटी की यादें बची हैं जिसमें उसकी कुछ किताबें, उसके कपड़े और उसके सपने हैं जिसे उनकी बेटी पूरा न कर सकी।

"सबसे बड़ी थी घर में, अब तो नौकरी भी करने लगी थी। हमने गरीबी में उसे पढ़ाया-लिखाया क्योंकि वो बहुत होशियार थी। सब लोग उसकी तारीफ़ करते थे, हमारी बिटिया तो सबको अच्छी खेती का हुनर सिखा रही थी। उसे क्या पता था कि वो ऐसे मरेगी," पीड़िता की माँ सर पर हाथ रखे सिसकियाँ ले रही थीं।

घटना के बाद इस माँ को रोजाना अनगिनत बार अपनी बेटी के साथ हुई वारदात को बताने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कभी कोई इन्हें तसल्ली देता तो कभी न्याय दिलाने का भरोसा दिलाता। कुछ नेता इन्हें आश्वासन देकर जाते कि जितना संभव होगा हम आपकी मदद करेंगे। पर इस माँ को ये सब बेकार लगता है क्योंकि इन्होंने अपनी बेटी खोई है जिसे अब कोई नहीं लौटा सकता।

पीड़िता की माँ के अनुसार जब पीड़िता घर आई तो उसके बाल बिखरे हुए थे, शरीर लुंज था, पैर में चप्पल नहीं थी, शरीर पर दुपट्टा नहीं था। वो जो लैगी पहने थी उसमें खून के दाग लगे हुए थे। वो एक कदम भी चलने की हालत में नहीं थी। पीड़िता की माँ ने बताया, "जब वो रिक्शे से उतरी तो एक कदम भी खुद से नहीं चल सकी, हमने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटाया, उसे पानी पिलाया, पंखा करते रहे। उसका पूरा शरीर लुंज था, लम्बी-लम्बी सांसे ले रही थी, पागल (बदहवास स्थिति) जैसी लग रही थी। कह रही थी पेट में बहुत तेज दर्द हो रहा है, जलन हो रही है।"

पीड़िता की माँ के अनुसार पीड़िता ने अपहरण के बाद नशे की सुई लगाने की बात बताई थी, इसके बाद उसके साथ क्या हुआ उसे कुछ पता नहीं था। पीड़िता घर से क्या कहकर निकली थी? इस पर पीड़िता की माँ ने बताया, "वो तुलसीपुर बीकॉम थर्ड ईयर में अपना एडमिशन कराने गयी थी, उसने एडमिशन भी कराया। जब वो घर आने के लिए चौराहे पर खड़ी थी तभी उसे किसी ने हाथ दिया और फिर गाड़ी में उठाकर तीन चार लोगों ने डाल लिया।"

उस डॉ का क्लीनिक जिसके पास मुख्य आरोपी का भतीजा उन्हें बुलाने आया था.

क्या कहती है एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट?

गाँव कनेक्शन को परिवार से जो बयान मिले वो एफआईआर कॉपी से बिलकुल अलग हैं एफआईआर में पीड़िता के भाई के अनुसार पीड़िता घर से सुबह 10 बजे अपने घर से कृषि विभाग कार्यालय (जिस संस्था में काम करती थी) सर्विस करने के लिए गयी थी, जब शाम चार बजे तक नहीं लौटी तब फोन से संपर्क किया। फोन से भी बात नहीं हो पाई, सब इंतजार ही कर रहे थे तबतक शाम 7 बजे उसे अचेत अवस्था में एक रिक्शा चालक घर छोड़ गया।

बलरामपुर सीएमओ के अनुसार पोस्टमार्टम में पीड़िता की मौत लीवर में इंजरी, ब्लीडिंग पेट के अन्दर ही धीरे-धीरे होती रही जिसकी वजह से डेथ (मौत) हुई है।"

पोस्टमार्टम रिपोर्ट गाँव कनेक्शन के पास है जिसमें मौत का तात्कालिक कारण हेमरेज और शॉक लिखा है।

इस तरह के मामलों में क्या कहते हैं वकील?

महिलाओं को निशुल्क कानूनी सलाह प्रदान करने वाली संस्था आली की कार्यकारी निदेशक एवं वकील रेनू मिश्रा कहती हैं, "इस तरह के मामले में अगर पीड़िता के बयान नहीं हुए हैं तब पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है इसलिए जांच को सिर्फ रेप या गैंगरेप के उससे नहीं देखना चाहिए और भी कई पहलुओं पर नजर होनी चाहिए। हाथरस की घटना से इस घटना को न जोड़ें, हमारी भी टीम गयी थी उन्हें भी दूसरे कई पहलू सामने आये हैं।"

रेनू मिश्रा आगे कहती हैं, "अगर मामला प्रेम प्रसंग का सामने आ रहा है तो उसे रेप या गैंगरेप में न किया जाए और अगर रेप या गैंगरेप का मामला है तो उसे प्रेम प्रसंग में न किया जाए। किसी भी मामले में कोई भी निर्दोष न फसे, जिसने आरोप किया है उसे ही सजा मिले इस बात का ख़ासकर ध्यान रखा जाए।"

मानवाधिकार कार्यकर्ता शुभांगी कहती हैं, "उत्तर प्रदेश सरकार ने 2015 में रेप केस के लिए एमएलसी (मेडिको लीगल) का प्रोर्फार्मा अनुसूचित किया था। अगर इस केस में गैंगरेप की एफआईआर हुई है तो वो फार्मा भरा क्यों नहीं गया?"

क्या कहते हैं पड़ोसी और आसपास के लोग?

हाथरस की तरह यहाँ के लोगों में जाति और धर्म को लेकर गुस्सा नहीं दिखा। ज्यादातर लोग इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। नुक्कड़ की दुकान पर बैठे लहराई यादव (85 वर्ष) कहते हैं, "इतनी उम्र में पहली बार ऐसी घटना अपने क्षेत्र में देखी है। हमारे आसपास हिन्दू मुस्लिम सब एक दूसरे से मिलकर रहते हैं। गैसड़ी में 50 फीसदी मुस्लिम रहते हैं पर क्या मजाल आजतक हिन्दू मुस्लिम में चूं हुई हो। बिटिया के साथ बहुत बुरा हुआ, जिसने भी किया चाहें वो किसी जाति धर्म का हो पर है तो अभी अपराधी उसे कठोर दंड मिले।"

आरोपी जिस जगह का है उस कस्बे का नाम गैसड़ी है। वहां बैठे कई लोगों ने लहराई यादव की बात का समर्थन किया। वहीं खड़े महेश यादव (18 वर्ष) कहने लगे, "इस घटना से हम लोग बहुत डर गये हैं। मुझे तो चिंता होने लगी है अपनी बहनों को अब बाहर कैसे भेजूंगा?"

जिस संस्थान में पीड़िता काम करती है वहां के एक कर्मचारी ने बताया, "जिस पद पर वो काम करती थी उसे उसके लिए बाहर नहीं जाना पड़ता था। अपनी ही ग्राम पंचायत में रहकर काम करना होता है। उनकी तरह हमारे यहाँ 48 बहनें जुड़ी हैं जो अपनी ग्राम पंचायत में रहकर किसानों को जागरूक करती हैं। वो काम के मामले में ए ग्रेड लड़की थी मिलनसार भी बहुत थी। ऐसा होगा तो लड़कियों को बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा।"

इस पूरे घटनाक्रम में कोई भी खुलकर बोल नहीं रहा है। लेकिन कई सवाल और चर्चाएं जरुर हैं। एक महिला ने दबी जुबान में कहा, "ऐसा सुनने में आ रहा है कि पीड़िता तीन चार महीने की गर्भवती थी। उसे दवा दी गई या सफाई (एबॉर्शन) कराई गयी कुछ साफ़-साफ़ पता नहीं है। पर ब्लीडिंग बहुत हो रही थी तभी शायद उसकी मौत हुई है।" इस बात का वहां बैठी और पांच छह औरतों ने समर्थन किया। गर्भपात कराने की बात की सुगबुगाहट गाँव में कई जगह सुनने को मिली।

पीड़िता के हाथ में लगे वीगो से भी लोग अंदाजा लगा रहे हैं एबॉर्शन के बाद बोतल चढ़ी है। क्या गैंगरेप हुआ है? इस पर लोग चुप्पी साध लेते हैं।

एक और महिला ने कहा, "पूरे गांव में यही शोर है पर कोई कुछ कहेगा नहीं। बिटिया की बात है पर हुआ तो उसके साथ गलत ही है। उसे क्या पता था कि उसे दवा नुकसान कर जायेगी और खून गिरना बंद नहीं होगा।"

कौन सी दवा नुकसान कर जायेगी? इस पर वो बोलीं, "अरे वही जिससे बच्चा गिर जाता है।" वो दवा यहाँ कहाँ पर मिलती है? वो बोलीं, "आप किसी भी मेडिकल स्टोर पर चले जाइए आपको दवा मिल जायेगी। अब ये सब लोकल डॉ हैं इतना आता-जाता नहीं है, अच्छी जगह उसकी समय से इलाज हो जाती तो वो शायद बच जाती।"

लेकिन पीड़िता की दूसरे नंबर की बहन प्रेगनेंसी की बात से पूरी तरह इनकार करती हैं। पीड़िता की इस बहन की शादी हो गयी है वो कहती हैं, "10-12 दिन पहले मैं घर आईं थी तो उसको (मृतका) पीरिड्यस हुए थे। फिर वो प्रेगनेंट कैसे हो गई?"

मुख्य आरोपी की पत्नी ने कहा, "मेरे पति को फसाया जा रहा है".

क्या कहता है आरोपी का परिवार?

आरोपी के घर के बाहर पुलिस फ़ोर्स तैनात थी। पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसरा था। घर में आरोपी की पत्नी, बच्चे, माँ सब थे मुख्य आरोपी शाहिद की शादी के छह साल हो गये हैं और तीन बेटियां हैं।

मुख्य आरोपी शाहिद की पत्नी ने बताया, "मेरे पति को झूठा फंसाया जा रहा है। मुझे बहुत प्यार करते थे, मायके कभी ज्यादा दिन के लिए नहीं जाने देते थे। थोड़ा कमाने-खाने लगे थे तभी लोगों को जलन हो गयी और फसा दिया। हमारी भी तीन बेटियां हैं, बहुत प्यार करते हैं इन सबको। वो ऐसे इंसान नहीं हैं जैसा बताकर उन्हें फसाया गया।"

मुख्य आरोपी के सगे बड़े भाई और भतीजे को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जिसमें 14-15 साल के भतीजे के नामज़द रिपोर्ट दर्ज है।

दूसरे आरोपी शाहिल की माँ बोलीं, "मेरा 14 साल का बच्चा है उसका भी नाम लिखवा दिया। बस उसकी गलती इतनी है कि वो अपने चाचा के साथ परचून की दुकान पर काम करता था।"


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